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भारत रत्न ''अटल जी'' का अटल भारत

भारत रत्न ''अटल जी'' का अटल भारत - Biography
 भारत रत्न ''अटल जी'' का अटल भारत - Biography

आज हमारे जननायक अटल बिहारी(Atal Bihari) बाजपेयी जी जयंती है भारत के दिवंगत भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने एक बार संसद में कहा था "सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए।" चूंकि देश सर्वोपरि है और एक राजनेता को अपने देश के लिए पूरी निष्ठा से काम करना चाहिए।

अटल बिहारी जी का प्रारंभिक जीवन :

अटल बिहारी (Atal Bihari) जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 ग्वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था।  उनके पिता का नाम श्री कृष्णा बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी मूल रूप से उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा जिले के प्राचीन स्थान बटेश्वर के रहने वाले थे। इसलिए अटल बिहारी वाजपेयी का पूरे ब्रज सहित आगरा से खास लगाव था। अटल जी के पिता स्कूल में अध्यापक थे अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र से एमए किया अटल बिहारी(Atal Bihari) वाजपेयी जीवन भर अविवाहित रहे और बाद में उन्होंने एक लड़की को गोद लिया था जिसका नाम उन्होंने नमिता रखा। 




अटल बिहारी जी एक राजनेता :

भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए फिर 1998 से 1999 और आखिरी बार 1999 से 2004 तक, राजनीति में अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी का प्रवेश 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ हुआ। इस आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से उन्हें और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। आजादी के बाद वे जनसंघ के नेता बने। अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी ने अपना पहला चुनाव 1957 में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर सीट से लड़ा था।  वो बाद में पार्टी के 1969 से लेकर 1972 तक भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। 1979 में जनता सरकार के गिरने के बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया।  वाजपेयी इसके संस्थापक सदस्य थे और पहले अध्यक्ष भी थे।1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे। 1997 में वो मोरार जी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री भी बनाए गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री मई 1996 में बने। लेकिन अल्प मत के कारण अटलजी 13 दिन तक देश के प्रधानमंत्री रहे। और उनको अपना पद छोडना पड़ा था। 1998 में भाजपा फिर दूसरी बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी जी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन 13 महीने बाद तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय जयललिता के समर्थन वापस लेने से उनकी सरकार गिर गई। अटल बिहारी वाजपेयी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल की और पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए 19 फरवरी 1999 को सदा--सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू कराई।लेकिन पाकिस्तान के घुसपैठ और कारगिल युद्ध की विजय का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया गया। कारगिल युद्ध में विजय के बाद हुए 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर अटल बिहारी(Atal Bihari) वाजपेयी के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद भाजपा ने अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी जी  के नेतृत्व में 13 दलों से गठबंधन करके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के रूप में सरकार बनाई और अटल बिहारी (Atal Bihari) वाजपेयी जी की सरकार ने अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूर्ण किया।

अटल बिहारी का कवि  रूप :


अटल बिहारी जी एक राजनेता के साथ साथ एक कवि के रूप में भी बहुत प्रसिद्ध थे उनकी अनेक कविताएँ आज भी लोगो के बीच गुनगुनायी जाती है उसमे से एक कविता यहाँ प्रस्तुत की है।

क़दम मिलाकर चलना होगा।
बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

पंद्रह अगस्त का दिन कहता:
आज़ादी अभी अधूरी है, सपने सच होने बाकी है,
रावी की शपथ न पूरी है, जिनकी लाशों पर पग धर कर
आज़ादी भारत में आई,वे अब तक हैं खानाबदोश
ग़म की काली बदली छाई। 

 

अटल बिहारी जी की बड़ी उपलब्धियां :

मई 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था ये अटल बिहारी जी के कार्यकाल की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है भारत एक परमाणु संपन्न देश है दुनिया को ये दिखाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने इतना बड़ा कदम उठाया था।अमेरिका सहित पश्चिम देशों के दबावों के बावजूद वाजपेयी ने साहसिक फैसला किया। ये जानते हुए भी कि परमाणु परीक्षणों के बाद देश को प्रतिबंधों के दौर से गुजरना पड़ सकता है  उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और देशहित में साहसिक फैसला लिया। उनके निर्देश पर भारत ने पोखरण में पांच परमाणु परीक्षण किए। इन परीक्षणों के बाद भारत पूर्ण रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश बन गया।अटल बिहारी जी के जिस काम को खासा अहम माना जा सकता है वो सड़कों के माध्यम से भारत को जोड़ने की योजना है, अटल बिहारी वाजपेयी देश के चार बड़े  महानगरों चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को जोड़ने के लिए स्वर्ण चतुर्भुज योजना शुरू की। औद्योगिक विकास को गति देने और परिवहन की सुगमता के लिए यह परियोजना क्रांतिकारी साबित हुई।

अटल बिहारी जी पुरस्कार विजेता:

सन 2015 में ही उन्हें  भारत के सर्वोच् नागरिक सम्मान भारत रत्न  से सम्मानित किया साथ ही 2015 में उन्हें बांग्लादेश सरकार ने फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड से नवाजा था। यह अवार्ड उन्हें  सन 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता  प्राप्त करने में बांग्लादेश की मदद करने के लिए दिया गया था। उस वक़्त वह लोकसभा के सदस्य थे। अटल बिहारी वाजपेयी को सन 2015 में मध्य प्रदेश के भोज मुक् विद्यालय ने भी डी लिट की उपाधि दी थी।उन्हें गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सन 1994 में श्रेष् सांसद के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।सन 1994 में उन्हें लोकमान्य  तिलक पुरुस्कार  प्राप्त हुआ था। सन 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी लिट की उपाधि से सम्मानित किया।1992 में उन्हें पद्म विभूषण के नागरिक सम्मान से नवाजा गया था।


अटल जी फिल्मों के शौकीन :

अटल बिहारी जी को कुछ चुनिंदा फिल्में बहुत पसंद थी, उनमेंदेवदास,’ ‘बंदिनी,’ ‘तीसरी कसम,’ ‘मौसम,’ ‘ममता और आँधीतथा जो अंग्रेजी फिल्में देखी थीं, उनमें जो सबसे अच्छी लगी, वह थी—‘ब्रिज ओवर रिवर क्वाई,’ ‘बॉर्न फ्रीऔरगांधी’  पसंदीदा फिल्मे है। 

उनके जीवन दर्शन और कविताओं ने भारत के युवाओं को एक नई प्रेरणा दी। उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।

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